Thursday, March 7, 2024

2024 के लोकसभा चुनाव।

 2024 के लोकसभा चुनाव आनेवाले कुछ ही दिनों में घोषित होनेवाले हैं।

वर्तमान समय में देश की सत्ता जिन हाथों में है कहा जाता है कि वह अपने में ईमानदार नहीं हैं, लंबे समय से यह देखा जा रहा है कि सारी लोकतंत्र की संस्थाओं को उसने अपनी सत्ता के लिए इस्तेमाल करते हुए उसके मूल कार्योंसे अलग कर अपने विरोधियों को फसाने का काम लिया जा रहा है इस सबकेबावजूद कोईभी बोलने वाला नहीं है जो भी बोलने की हिम्मत करता है उसको किसी ने किसी तरह से फंसा करके जेल में डाल दिया जा रहा है। परंतु इस बात की तरफ किसी भी संस्था में संविधान को भी ताकपर रखा जा रहा है। यह ऐसी विपरीत परिस्थिति है जब सबकी जुबान बंद कर दी गई है।

आईए आपको एक संसदीय चुनाव क्षेत्र के बारे में बताते हैं:

आईए जानते हैं जौनपुर की राजनीति के बारे में:

संसदीय राजनीतिक इतिहास में जो लोग जौनपुर को जानते हैं वह यह अच्छी तरह से जानते हैं कि जौनपुर की राजनीति में ठाकुरों और ब्राह्मणों का बोलबाला रहा है, वह एक दौर था जब राजनीति में अन्य जातियों का उदय नहीं हुआ था।

राजा जौनपुर ठाकुर राम लखन सिंह श्री राजदेव सिंह उस दौर के ऐसे ही राजनीतिज्ञ थे। लेकिन इन्हीं सबके मध्य श्री लक्ष्मी शंकर यादव जी कांग्रेस की राजनीति में एक बड़े नाम थे विस्तार से न जाते हुए यह बताना यहां लाजमी है की जब से इस जनपद में यादव ने अपनी एक झुकता के साथ बहुजन समाज की जातियों को जोड़कर के राजनीतिक खेल में अपनी पारी शुरू की तब जौनपुर का संसदीय नजरा ही बदल गया। अर्जुन यादव से लेकर पारसनाथ यादव यहां के संसदीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी जीत दर्ज कराई जिसके पीछे यहां के बहुजन समाज के साथ-साथ तत्कालीन राजनीति का बहुजन दबाव बहुत महत्वपूर्ण है अब यह अलग बात है कि इस आंदोलन से इसके मुखिया यादव जाति के ऐसे लोग आगे आए जिन्होंने पूरी राजनीति में एक तरह की निराशा का समावेश किया क्योंकि वह राजनीतिज्ञ नहीं थे उनके पीछे जो राजनीतिज्ञ थे सबसे पहले उन्होंने उन्हें ही धोखा दिया परिणाम यह हुआ कि उन्हें विजय तो मिली लेकिन समय के साथ राजनीति में इतना उतार आया कि आज जौनपुर जनपद की राजनीति में जब यादव सांसद हैं लेकिन वह वर्तमान चुनाव की चर्चा से ही बाहर है।

इसके भी बहुत सारे कारण हैं क्योंकि वह सांसद तो बन गए परंतु राजनीतिज्ञ नहीं बन पाए राजनीतिज्ञ होने के लिए जरूरी नहीं है कि व्यक्ति बहुत पढ़ा लिखा हो बहुत बड़ा अधिकारी हो उसे राजनीतिज्ञ और सामाजिक होने की समझ होनी चाहिए।

श्री कृपा शंकर सिंह जी को भाजपा ने अपना प्रत्याशी किस लिए बनाया है इस पर भी गौर करने की जरूरत है ज्ञातव्य है की कृपा शंकर सिंह मूलतः जौनपुर के रहने वाले हैं लेकिन उनका पूरा राजनीतिक इतिहास देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से आरंभ होता है और वहीं से वह कांग्रेस के नेता के रूप में राज्य सरकार में गृह मंत्री जैसे पद पर विराजमान रहे और कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में बहुत सफल काम किया है। उनके कांग्रेस के गांधी परिवार से बहुत मधुर रिश्ते रहे हैं जिसकी जानकारी किसी से भी की जा सकती है। वर्तमान केंद्रीय सत्ता के ऑपरेशन कांग्रेस जिसको इस तरह से कहा जा सकता है कि कांग्रेस मुक्त भारत अभियान में यह भाजपा के अंग हो गए अब आप उनकी राजनीतिक हैसियत का आकलन इसी रूप में कर सकते हैं कि भाजपा में कितने कांग्रेसी किस-किस तरह से और किन कारणों से खपाए गए हैं।

अब आईए समाजवादी पार्टी की बात कर लेते हैं, 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बसपा ने लोकसभा के लिए गठबंधन किया था और बसपा ने उन तमाम सीटों को अपने खाते में लिया था जो जितने की सामर्थ्य रखती थी, यह किसी से छुपा नहीं है कि बहन जी अपने प्रत्याशियों से मोटी रकम वसूलती हैं। इसी तरह के प्रत्याशी को कहा जाता है कि मोटी धनराशि लेकर टिकट दिया गया था, स्वाभाविक था कि जौनपुर जनपद की यह सीट सपा और बसपा मतदाताओं से वोट की वजह से छिनी नहीं जा सकती थी, हालांकि उससे पहले जौनपुर का सांसद भाजपा का सांसद था और वही चुनाव भी लड़ रहा था लेकिन सपा बसपा गठबंधन ने उसको हताश और निराश कर दिया था जबकि जौनपुर जनपद की दूसरी सुरक्षित सीट सपा के लिए बहुत मजबूत सेट हुआ करती है वह भी भाजपा के खाते में थी लेकिन वहां बसपा का प्रत्याशी उस सीट के मत को संभाल नहीं पाया और चुनाव हार गया जबकि जौनपुर लोकसभा सीट सपा बसपा गठबंधन की बसपा प्रत्याशी के पक्ष में गई।

5 वर्षों के संसदीय काल में वर्तमान सांसद ने ऐसी कौन सी राजनीति की जिसकी वजह से आज वह पर्दे के पीछे से अपने लिए राजनीतिक घरानों का चक्कर काट रहे हैं कि उन्हें फिर से कौन चुनाव में उतार दे बसपा के सांसद होने के बावजूद भी वह बसपा से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं इसका एक ही कारण है कि बसपा की जीत की कोई संभावना आज दिखाई नहीं देती। ऐसा कहा जाता है कि उनके ताल्लुक भाजपा में भी रहे हैं और उन्होंने वहां से भी 2024 की संसद के लिए प्रयास किया था लेकिन जौनपुर जनपद के लिए भाजपा की संसदीय सीट पर श्री कृपा शंकर जी के आने की वजह से वह संभावनाएं समाप्त हो गई हैं।

सपा बसपा अभी भी अपने कैंडिडेट के बारे में कोई घोषणा नहीं की है लेकिन इस समाचार पत्र नहीं धनंजय सिंह को सपा के प्रबल प्रत्याशी के रूप में बताने की जो कोशिश की है वह एक तरह से सपा को कमजोर करने की साजिश भी है इस पूरी खबर में सपा के अस्तित्व को ही नकारने की अपोजिट खबर बनाया गया है जो किसी भी समझदार व्यक्ति के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है और इस सब रणनीति का लब्बोलुआब यही बनता है कि क्या सपा भी बसपा के रास्ते पर चल पड़ी है जब बसपा अपने संसद के साथ खड़ी ना दिखाई देकर एक संदेश देती है कि सपा इतनी कमजोर क्यों दिखाई दे रही है जबकि उसके पास हर तरह के प्रत्याशी मौजूद हैं। उन प्रत्याशियों के चयन में सपा सपा कितनी बुद्धिमानी दिखाएंगे वह उसकी रणनीति का बहुत बड़ा हथियार साबित होगा।

सपा को राजनीति करनी है या अपने दायर को ऐसी दहलीज तक ले जाना है जहां से इंडिया गठबंधन की संभावनाएं समाप्त होती दिखाई देती हैं।

सपा के अगले कदम का इंतजार करना होगा।



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