Wednesday, December 25, 2019

ताकि सनद रहे।

ताकि सनद रहे !

आजकल पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव इस बात से बेहद परेशान है कि भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री श्री  योगी आदित्य नाथ जी उनके कराए गए कामों को अपने नाम के नामपट लगवाकर फिर से उद्घाटन कर रहे हैं। यह तो उसी दिन तय हो गया था जिस दिन श्री अखिलेश यादव मुख्यमंत्री के रूप में ऐसा ताना-बाना बुन रहे थे जिसको भाजपा के लोग कभी भी सहन करने वाले नहीं थे । 

मेरा ऐसा मानना है कि सरकार में रहकर जब कोई नेता या व्यक्ति चमचों घिरा होता है, तब उसकी हैसियत को सामने वाला आंक लेता है . इस समय को अगर देखा जाए तो निश्चित तौर पर भाजपा अनेकों प्रकार के दुष्कर्म और दुराग्रह से पूरे प्रदेश में शासन कर रही है और उसके प्रशंसक उसके इन कार्यों को पसंद भी कर रहे हैं। समस्या यह नहीं है बल्कि यह है कि सरकार आगे भी चलती रहेगी। समस्या यह है कि जिस तरह से इस सरकार को बदलने का इरादा विपक्ष में होना चाहिए वह इरादा ही नहीं दिख रहा है। उन्हें उम्मीद है कि यह अपने दुष्कर्म से चली जाएगी और जनता आने वाले दिनों में फिर से श्री अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री के रूप में चुन लेगी।
ऐसा हो भी सकता है लेकिन जिस तरह से राजनैतिक और सामाजिक समीकरण तोड़ मरोड़ कर के बहुजन राजनीति को किनारे किए जाने का संकल्प संघ नियंत्रित शासन पूरे देश में कर रहा है. उससे तो यह नहीं लगता कि भविष्य में किसी भी तरह का बदलाव होने जा रहा है।

चलिए बात करते हैं आपके शासनकाल का जिसका एक उदहारण नीचे दे रहा हूँ : जो आप के कार्यकाल का एक उदाहरण है जिसमें आपने भी वही किया जो आज की मौजूदा सरकार कर रही है फर्क इतना है कि उनको इस बात का एहसास है कि वह यह सारा काम किसके लिए कर रहे हैं और आपको इस बात का एहसास ही नहीं था आप किसके लिए कर रहे हो।

यह तो लखनऊ का हाल है जनाब !

आइए गाजियाबाद जहां आपकी सरकार के/में शुरू कराए गए कार्यों को जो आपके वक़्त में पूरे होने और आपसे उद्घाटित होने थे जिन्हें इस काम को अंजाम देना था और जिन्होंने शुरू किया था जरा याद करिए आपकी तुगलकी नीतियों ने उस अफसर को स्थानांतरित करके मुख्यमंत्री और सरकारी अभिमान ने आनेवाली सरकार को परोश दिया था।

आपको ही नहीं देश के लोगों को पता था आपके काबिल अफसर के देखरेख में यह सब हो रहा था । लेकिन आपके अहंकार ने ऐसा होने दिया ? क्योंकि आपके टुच्चे चमचों और निकम्मी नौकरशाही ने पानी फेर दिया था उस पूरी योजना पर।

याद करिए उस कहानी को जो भले ही एक शहर की हो पर उस शहर के इतिहास में दर्ज होने से आपने स्वयं को रोक लिया था।
मेट्रो
एलिवेटेड रोड
सिटी फारेस्ट
और भी बहुत कुछ.......
मान्यवर ऐसे ही बहुत सारी बातें हैं जिन्हें आपके काबिल नेतृत्व में होने की उम्मीद थी लेकिन मैं बहुत स्पष्ट रूप से यह कह सकता हूं आपके चारों तरफ जिस तरह के चमचों की फौज घेरे हुए है उससे बहुत सारी बातें रुक जाती जिन्हें आप तक पहुंचना चाहिए ।

"निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय" !

आपके राज्य में यही चूक हुई थी क्योंकि आपके करीब निंदक नहीं थी बल्कि आपके दुश्मन थे केइयों को तो मैं स्वयं जानता हूं। हो सकता है आपको ना लगता हो लेकिन जो इस पूरे मूवमेंट में संघर्ष किए हैं वे जानते हैं कि समाजवादी और पूंजीवादी रास्ते क्या है और राजनीतिक विमर्श क्या है क्या आपको पता है आज प्रदेश से राजनीतिक विमर्श गायब हो गया है। और पूरे देश में जिस विमर्श की आपसे संभावना थी वह आपने शुरू ही नहीं की। नहीं तो एक मठ के पुजारी और हजारों व्यापारियों की जो फौज आप के इर्द गिर्द थी उसी में से निकले देश की राजनीति पर काबिज लोगों से परास्त होने का कोई मतलब नहीं था।

बातें बहुत हैं सार्वजनिक प्लेटफार्म पर उन्हें लिखा जाना उचित भी नहीं है लेकिन शुरुआत तो करनी होगी कहीं से भी यदि कोई आपका शुभचिंतक इसे पढ़ें और आपको पढ़ाई तो मुझे खुशी होगी क्योंकि आपके उत्कर्ष से हम सबों को प्रसन्नता होती है लेकिन जो आपका अपकर्ष चाहते हैं आप उनसे खुश रहते हैं मैं स्वयं तमाम ऐसे लोगों को जानता हूं जो आपकी ईद गिर्द रहकर पूरे सिस्टम का लाभ लेते हैं और पीछे से आपके विनाश की कामना करते हैं।

मुझे याद है मैंने यह बात एक बार दिल्ली में नेताजी के साउथ एवेन्यू के आवास पर फूलन देवी और प्रोफेसर ईश्वरी प्रसाद के सामने कहा था जब नेताजी के साथ अंदर अमर सिंह और केसी त्यागी आपस में लड़ रहे थे और हम लोग बैठे बाहर उनका इंतजार कर रहे थे तो मैंने यह कहा कि जो लोग नेता जी का 24 घंटे विनाश चाहते हैं वह तो दिल्ली में उनके निकाले हुए वक्त का पूरा उपयोग कर रहे हैं और जो लोग 24 घंटे नेताजी का विकास चाहते हैं शायद उन्हें समय ही ना मिले, इस बात को फूलन जी ने बहुत ही गंभीरता से लिया था और अपने पति उम्मेद सिंह से कहा कि यह कितनी सही बात है और उन्होंने हमें भी समर्थन दिया कि आप ठीक कह रहे हो।

और ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं जो सामाजिक न्याय और समाजवाद के ऊपर कलंक जैसे विराजमान हैं।

डॉ लाल रत्नाकर
(ताकि सनद रहे.....)

1 comment:

  1. यह ब्लॉक सामाजिक विमर्श के लिए बनाया गया है जिसमें बहुजन विमर्श प्रमुख रूप से प्रासंगिक होगा यदि आप इसमें कुछ लिखना चाहते हैं तो स्वागत है।

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